असली आपातकाल में पहले कुछ मिनट सबसे अहम होते हैं। जान बचाने के लिए डॉक्टर होना ज़रूरी नहीं — बस कुछ आसान हुनर और उन्हें इस्तेमाल करने का हौसला चाहिए। यहाँ चार सबसे आम स्थितियाँ हैं: दिल की धड़कन रुकना, तेज़ खून बहना, जलना और गले में चीज़ फँसना।
1. सीपीआर: छाती के बीच में ज़ोरदार और तेज़ दबाव
अगर कोई अचानक गिर पड़े और सामान्य सांस न ले रहा हो, तो पहले इमरजेंसी नंबर पर कॉल करें, फिर तुरंत छाती पर दबाव देना शुरू करें। हथेली का नीचे वाला हिस्सा छाती के बीच में रखें, 5–6 सेंटीमीटर दबाएँ और हर मिनट 100–120 बार का रिदम बनाए रखें। मदद आने तक या सांस लौटने तक न रुकें। आसपास मौजूद लोगों के लिए हाथों से किया गया सीपीआर ही काफ़ी है, और कुछ करना, कुछ न करने से हमेशा बेहतर है।
2. तेज़ खून बहना: दबाव से खून रुकता है
बेकाबू खून बहना मिनटों में जानलेवा हो सकता है। घाव पर साफ़ कपड़ा या पट्टी रखकर ज़ोर से और लगातार दबाएँ — बार-बार न हटाएँ। अगर कपड़ा भीग जाए तो ऊपर और कपड़ा रखें। हाथ या पैर का खून न रुक रहा हो तो घाव से ऊपर टाइट बंधन जान बचा सकता है। धँसी हुई चीज़ कभी बाहर न खींचें — उसके चारों ओर गद्दी लगाएँ।
3. जलना: ठंडा करें, मक्खन-तेल न लगाएँ
हल्की जलन में सबसे ज़रूरी काम है जले हुए हिस्से को कम से कम 20 मिनट तक बहते ठंडे पानी के नीचे रखना। मक्खन, तेल, बर्फ़ या टूथपेस्ट कभी न लगाएँ; ये गर्मी रोककर नुकसान बढ़ाते हैं। साफ़ कपड़े से ढीला ढक दें। गंभीर जलन (सफ़ेद या काली पड़ी त्वचा, बड़ा हिस्सा, चेहरे या जोड़ों पर जलन) दिखे तो तुरंत अस्पताल जाएँ।
4. गले में चीज़ फँसना: हाइमलिच विधि 30 सेकंड में
अगर कोई वयस्क गले में चीज़ फँसने से खाँस, बोल या सांस न ले पा रहा हो, तो उसके पीछे खड़े होकर नाभि से थोड़ा ऊपर तेज़ी से अंदर और ऊपर की ओर खींचें — चीज़ निकलने तक दोहराएँ। पहले पीठ पर पाँच मज़बूत थपथपाएँ। एक साल से छोटे बच्चे के लिए पीठ पर थपथपाएँ और छाती पर हल्के दबाव बारी-बारी से दें।
शांत रहें, मदद बुलाएँ, और सीखना जारी रखें
आपातकाल में घबराहट स्वाभाविक है, लेकिन डर किसी की मदद नहीं करता। गहरी सांस लें, इमरजेंसी नंबर डायल करें और काम शुरू करें। सर्टिफ़ाइड फर्स्ट एड कोर्स ज़रूर करें, और घर, गाड़ी, ऑफिस में बेसिक फर्स्ट एड किट रखें। तैयार लोग जान बचाते हैं।